मेरठ के कपड़ा कारोबारी इकबाल के मकान में आग के दौरान मौजूद रहे इकबाल के बड़े बेटे फारूक की पत्नी नाजिश और बेटी जकिया ने दहशत में गुजरे पलों की दास्तां बयां की। उन्होंने बताया कि परिवार की सभी महिलाएं मकान की प्रथम मंजिल के कमरे में नमाज पढ़ रहीं थीं, तभी कुछ ही देर में मकान में आग लग गई और घर में धुएं का गुबार भर गया। बचाव के लिए पहुंचे लोगों की मदद से वह घर से बाहर निकल आईं।
उन्होंने वहां से गुजर रहे बाइक सवार दो लोगों को रोका और उनसे मदद मांगी। इसके बाद बाइक सवारों ने भी शोर मचाया तो अन्य लोग बचाव के लिए दौड़ पड़े। मकान में फंसी जकिया ने बताया कि वह भी नमाज पढ़ रहीं थीं।
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आग में झुलसी नाजिश
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने खुद को परिवार के बच्चों को बचाने का प्रयास किया। इस प्रयास में वह भी मकान में फंस गईं। इससे उनके हाथ और पैर भी झुलस गए। बाद में उन्हें लोगों की मदद से छत के रास्ते बाहर निकाला गया।
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महिला और तीन बच्चों के एक साथ उठे जनाजे में शामिल आसपास के लोग व परिजन
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पहले बच्चों को लेकर नीचे फिर दूसरी मंजिल पहुंची रुखसार
नाजिश ने बताया कि रुखसार पहले बच्चों की जान बचाने के लिए नीचे की ओर भागी, जबकि अन्य लोग दूसरी मंजिल पर ही थे। नीचे आग और धुएं का गुबार देखकर फिर वह बच्चों को लेकर दूसरी मंजिल पर चली गई। उसने बच्चों को बचाने के लिए कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। इससे कमरे में धुआं भर गया।
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मृतक बच्चे और महिला
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अमीर बानो पूछती रही कहां हैं सभी लोग
पीड़ित परिवार ने बताया कि मकान में मौजूद आसिम की मां अमीर बानो धुएं के कारण बेसुध हो गई थीं। उन्हें भी वहां से निकालकर राजधानी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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महिला और तीन बच्चों के एक साथ उठे जनाजे में शामिल आसपास के लोग व परिजन
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आसिम ने बताया कि उनकी मां का अभी उपचार चल रहा है। इसलिए दूसरे दिन भी उन्हें यह नहीं बताया कि आगजनी में परिवार के छह लोगों की जान चली गई है। हालांकि उन्होंने बताया कि वह उनसे मिलने गए तो पूछने लगीं कि परिवार के सभी लोग कहां है। अकदस को लेकर क्यों नहीं आया।